MP Board Class 12th Political Science (राजनीति शास्त्र) chapter 2 दो ध्रुवीयता का अन्त [The Collapse of Bipolarity] important Questions in Hindi Medium

MP Board Class 12th Political Science (राजनीति शास्त्र) chapter 2 दो ध्रुवीयता का अन्त [The Collapse of Bipolarity] important Questions in Hindi Medium

अध्याय 2 दो ध्रुवीयता का अन्त [The Collapse of Bipolarity]

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु – विकल्पीय प्रश्न

 

  1. द्वि- ध्रुवीयता के उदय का कारण था

(i) दो महाशक्तियों का उद्भव

(ii) बड़ी शक्तियों की कम संख्या

(iii) परमाणु हथियारों की दौड़

(iv) उपर्युक्त सभी कारण ।

 

  1. कठोर द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था का दशक था

(i) 1945-1955

(ii) 1955-1965

(iii) 1975-1985

(iv) 1995-2005.

 

  1. निम्नांकित में बाल्टिक गणराज्य कौन-सा है ?

(i) एस्टोनिया

(ii) लताविया

(iii) लिथुआनिया

(iv) उक्त सभी ।

 

  1. सोवियत संघ के विघटन में केन्द्रीय भूमिका का निर्वहन किसने किया ?

(i) जोजेफ स्टालिन

(ii) बोरिस येल्तसिन

(iii) ब्लादिमीर लेनिन

(iv) इनमें कोई नहीं।

 

  1. सोवियत बोल्शेविक क्रान्ति का नेतृत्व निम्नांकित में किसके द्वारा किया गया ?

(i) चर्चिल

(ii) स्टालिन

(iii) लेनिन

(iv) ख्रुश्चेव ।

 

  1. सोवियत संघ के अन्तिम राष्ट्रपति कौन थे ?

(i) मिखाइल गोर्बाचेव

(ii) बोरिस येल्तसीन

(iii) खुश्चेव

(iv) ब्रेझनेव ।

 

  1. वर्तमान में रूस के राष्ट्रपति कौन थे ?

(i) बोरिस येल्तसिन

(ii) मिखाइल कास्यानोव

(iii) ब्लादिमीर पुतिन

(iv) दिमित्री मेदवेदेव ।

 

  1. रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने ‘राष्ट्रकुल’ की घोषणा सम्बन्धी समझौते को कब हस्ताक्षरित किया ?

(i) 14 फरवरी 1990

(ii) 8 दिसम्बर 1991

(iii) 21 दिसम्बर 1991

(iv) 26 दिसम्बर 1991.

 

  1. निम्नलिखित में कौन-सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है ?

(i) संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच विचारात्मक लड़ाई का अन्त

(ii) स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का जन्म

(iii) विश्व व्यवस्था के शक्ति सन्तुलन में बदलाव

(iv) मध्य पूर्व में संकट

 

उत्तर- 1. (iv), 2. (i), 3. (iv), 4. (ii), 5. (iii), 6. (i) 7. (iii), 8. (ii), 9. (iv).

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. ……………………….पूँजीवादी दुनिया तथा साम्यवादी विश्व के बीच विभाजन का प्रतीक थी।
  2. सोवियत संघ में……………………………… को सर्वाधिक पसन्द किया जाता था।
  3. लेनिन के उत्तराधिकारी…………………………… थे।
  4. चेकोस्लाविया के…………………………….. का दमन लिओनिद ब्रेझनेव ने किया था।
  5. …………………….का शाब्दिक अर्थ आघात पहुँचाकर उपचार करना है।
  6. सोवियत राजनीतिक प्रणाली ……………………………की विचारधारा पर आधारित थी।
  7. सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन ……………………………..था।
  8. …………………………. पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।

9…………………………… ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत थी।

  1. ……………………….का गिरना शीत युद्ध अन्त का प्रतीक था।

 

उत्तर- 1. बर्लिन की दीवार, 2. फिल्म अभिनेता राजकपूर, 3. जोजेफ स्टालिन, 4. जन विद्रोह, 5. शाक थैरेपी, 6. समाजवाद, 7. वारसा पैक्ट, 8. कम्युनिस्ट, 9. मिखायल गोर्बाचेव, 10. बर्लिन की दीवार ।

 

जोड़ी मिलाइए

I.

 

‘क’

  1. सोवियत संघ में गणराज्यों की संख्या
  2. शाक थैरेपी अपनायी गई
  3. मिखाइल गोर्बाचेव कम्युनिष्ट पार्टी महासचिव बने
  4. सोवियत संघ का अन्त
  5. सोवियत संघ द्वारा अफगानिस्तान में हस्तक्षेप

 

‘ख’

 

(i) 1985

(ii) 25 दिसम्बर, 1991

(iii) 1990

(iv) 1979

(v) पन्द्रह

 

उत्तर – 1. → (v), 2. → (iii), 3. → (i), 4. → (ii), 5. → (iv).

II.

 

‘क’

  1. मिखाइल गोर्बाचेव
  2. शाक थैरेपी
  3. रूस
  4. बोरिस येल्तसिन
  5. वारसा

 

‘ख’

 

(i) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी

(ii) सैन्य समझौता

(iii) सुधारों की शुरुआत

(iv) आर्थिक मॉडल

(v) रूस के राष्ट्रपति

 

उत्तर – 1. (iii), 2. → (iv), 3. → (i), 4. (v), 5. (ii).

 

एक शब्द / वाक्य में उत्तर

  1. द्विध्रुवीकरण से आप क्या समझते हैं ?
  2. वर्तमान में ध्रुवीकरण की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा ?
  3. रूसी संसद ने सोवियत संघ से अपनी स्वतन्त्रता कब घोषित की थी ?
  4. 150 किमी से भी अधिक लम्बी बर्लिन की दीवार कब बनाई गई थी ?
  5. ताशकंद किस देश की राजधानी है ?

 

उत्तर – 1. एक ऐसी व्यवस्था जिसमें दो शक्तियों का अस्तित्व होता है, 2. ध्रुवीकरण की राजनीति कमजोर हुई है, 3 जून 1990 में, 4. 1961 में, 5. उज्बेकिस्तान

 

सत्य / असत्य

  1. सोवियत राजनीतिक प्रणाली समाजवादी (साम्यवाद) पर आधारित थी।
  2. अक्टूबर 1917 में सोवियत संघ (रूस) में पहली कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार सर्वप्रथम लोकतान्त्रिक चुनावों के आधार पर बनी थी।
  3. रूस में वही राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था है जो पूर्व सोवियत संघ में थी।
  4. उत्तर साम्यवादी व्यवस्था में उदार लोकतन्त्र की कोई जगह नहीं हो सकती।
  5. स्वतन्त्रता की घोषणा करने वाला प्रथम सोवियत गणराज्य लिथुआनिया था।

 

उत्तर- 1. सत्य, 2. सत्य, 3. असत्य, 4. असत्य, 5. सत्य ।

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. मिखाइल गोर्बाचेव ने आर्थिक एवं राजनीति सुधार हेत सोवियत संघ में किन-किन नीतियों को अपनाया था ?

उत्तर-(1) पेरेस्रोइका अर्थात् पुनर्रचना तथा (2) ग्लासनोस्त अर्थात् खुलेपन की नीति को अपनाया था।

 

प्रश्न 2. सोवियत संघ के पतन का प्रमुख कारण बताइए।

उत्तर- देश की राजनीति एवं आर्थिक संस्थाओं की आन्तरिक कमजोरी सोवियत संघ के पतन का प्रमुख कारण थी।

 

प्रश्न 3. सोवियत विघटन के पश्चात् अधिकांश गणराज्यों की अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवित होने का कारण लिखिए। उत्तर- सोवियत विघटन के पश्चात् उससे अलग हुए गणराज्यों की अर्थव्यवस्था खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा धातु जैसे प्राकृतिक संसाधनों के निर्यात से शीघ्र ही पुनर्जीवित हो गयी।

 

प्रश्न 4. सोवियत विघटन के पश्चात् उसके राजनीतिक उत्तराधिकारी रूस ने किस प्रकार की अर्थव्यवस्था अपनाई ? उत्तर- रूस ने उदारवादी अर्थव्यवस्था को अपनाया। देश में निजीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप तीव्र गति से विकास हुआ।

 

प्रश्न 5. रूस के साथ किन-किन देशों की सीमाएँ मिलती हैं ?

उत्तर- रूस के साथ नार्वे, फिनलैण्ड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, पोलैण्ड, बेलारूस, यूक्रेन, जार्जिया, अजरबेजान, कजाकिस्तान, चीन, मंगोलिया तथा उत्तर कोरिया की सीमाएँ मिलती हैं।

 

प्रश्न 6. रूस में कितने प्रदेश हैं ?

उत्तर- रूस में 83 प्रदेश हैं, जिनमें 46 प्रान्त, 21 गणराज्य (आंशिक रूप से स्वायत्त), 9 स्वायत्त रियासत, 4 स्वायत्त जिले, 1 स्वायत्त प्रान्त तथा 2 केन्द्रशासित नगर मास्को एवं सेंटपीटर्सबर्ग हैं।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र कीजिए।

उत्तर- तीन विशेषताएँ निम्न प्रकार हैं

(1) सोवियत अर्थव्यवस्था समाजवादी अर्थव्यवस्था पर आधारित थी।

(2) सोवियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध तथा राज्य के नियन्त्रण में थी। (3) सोवियत अर्थव्यवस्था में भूमि तथा अन्य उत्पादक समस्याओं पर राज्य का ही स्वामित्व एवं नियन्त्रण था।

 

प्रश्न 2. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ महाशक्ति के रूप में क्यों उभरा ? कोई तीन कारण लिखो।

उत्तर- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ एक महाशक्ति के रूप में उभरा, जिसके प्रमुख कारण निम्नवत् हैं

 

(I) सोवियत संघ की संचार प्रणाली अत्यधिक आधुनिक एवं उन्नत प्रकार की थी।

(2) सोवियत संघ के पास विशाल ऊर्जा संसाधन थे जिनमें खनिज तेल, लोहा, इस्पात तथा मशीनरी उत्पाद प्रमुख रूप से सम्मिलित थे।

(3) सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका को छोड़कर शेष विश्व की अपेक्षाकृत कहीं ज्यादा विकसित थी ।

 

प्रश्न 3. सोवियत प्रणाली के कोई चार अवगुण अथवा दोष लिखिए।

 

उत्तर – सोवियत प्रणाली के प्रमुख दोष (अवगुण) अथवा कमियों को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) सोवियत प्रणाली पूर्णरूपेण नौकरशाही द्वारा नियन्त्रित थी। अतः वह निरन्तर सत्तावादी होती चली गयी और जनसाधारण का जीवन लगातार मुश्किलों भरा होता चला गया।

(2) सोवियत प्रणाली प्रौद्योगिकी तथा आधारभूत ढाँचे को सुदृढ़ नहीं कर पायी और पाश्चात्य देशों से अत्यधिक पिछड़ गयी। सोवियत संघ ने हथियारों के निर्माण में देश की आय का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया।

(3) कम्युनिस्ट पार्टी के कठोर दलीय अनुशासन वाले सोवियत संघ में समस्त संस्थाओं पर साम्यवादी दल का कड़ा नियन्त्रण था और दल वहाँ की जनता के प्रति भी उत्तरदायी नहीं था।

(4) सोवियत संघ के पन्द्रह गणराज्यों में रूस अत्यधिक वर्चस्वशाली था तथा शेष चौदह गणराज्यों के नागरिक स्वयं को उपेक्षित एवं दबा हुआ मानते थे।

 

प्रश्न 4. सोवियत संघ विघटन हेतु उत्तरदायी किन्हीं चार कारणों को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर- सोवियत संघ के विघटन के लिए प्रमुख रूप से निम्न कारण उत्तरदायी थे

(1) सोवियत संघ द्वारा 1979 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था अत्यन्त दयनीय स्थिति में पहुँच गयी थी। N

(2) सोवियत संघ में प्रतिवर्ष खाद्यान्न आयात लगातार बढ़ता ही चला गया। 1970 दशक के अन्तिम वर्षों में यह व्यवस्था लड़खड़ा गई और अन्तत: ठहर ही गई।

(3) हालांकि सोवियत संघ के नागरिकों के पारिश्रमिक की दरें लगातार बढ़ीं लेकिन उतपादकता और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वह पाश्चात्य देशों से प्रतिस्पर्द्धा में काफी पीछे रह गया इसके परिणामस्वरूप प्रत्येक प्रकार की उपभोग वस्तुओं की कमी हो गयी ।

(4) आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुके सोवियत संघ के लोग तत्कालीन राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव के सुधारों की धीमी गति से असन्तुष्ट थे।

 

प्रश्न 5. शॉक थैरेपी के चार परिणाम लिखिए।

उत्तर- शॉक थैरेपी का शाब्दिक अर्थ आघात पहुँचाकर उपचार करना है। इसी तरह शॉक थैरेपी का अभिप्राय धीरे-धीरे बदलाव न करके एकदम से आमूलचूल परिवर्तन के प्रयासों को थोपना है। शॉक थैरेपी के प्रमुख परिणामों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) 1990 में अपनायी गयी शॉक थैरेपी लोगों को उपभोग के उस चरमोत्कर्ष तक न ले जा पाई जिसका उसने वायदा किया था। शॉक थैरेपी से जहाँ सम्पूर्ण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हुई, वहीं लोगों को भयंकर बर्बादी से होकर गुजरना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप सम्पूर्ण रूस का नियन्त्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा कर धराशाई हो गया।

(2) शॉक थैरेपी के परिणामस्वरूप मुद्रा स्फीति में वृद्धि हुई और रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में अश्चर्यजनक गिरावट हुई। देश में मुद्रास्फीति इतनी बढ़ी के जमा पूँजी भी डूब गई। प्राचीन व्यापारिक ढाँचा छिन्न-भिन्न हुआ लेकिन उसकी जगह कोई नवीन वैकल्पिक व्यवस्था स्थापित नहीं हो सकी।

(3) हालांकि आर्थिक बदलावों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए उसे पर्याप्त स्थान भी दिया गया लेकिन लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्यात का कार्य ऐसी प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका।

 

(4) निजीकरण से नवीन विषमताओं का प्रादुर्भाव हुआ। पूर्व सोवियत संघ में सम्मिलित रहे गणराज्यों तथा विशेष रूप से रूस में धनिक वर्ग एवं निर्धन वर्ग एवं निर्धन वर्ग के मध्य एक गहरी खाई बनी। इस प्रकार देश में अमीर-गरीब के बीच गहरी असमानता उदित हो चुकी थी।

 

दीर्घ उत्तरीय / विश्लेषणात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए ?

उत्तर- गोर्बाचेव निम्नांकित कारणों से सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए ( 1 ) पाश्चात्य देशों में सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्रान्तिकारी बदलाव हो रहे थे जिसकी वजह से गोर्बाचेव के लिए सोवियत संघ में आर्थिक सुधार करने परमावश्यक हो गए थे।

(2) गोर्बाचेव पाश्चात्य देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने एवं सोवियत संघ को लोकतान्त्रिक रूप देने की दृष्टि से सुधारों हेतु बाध्य हुए।

(3) सोवियत संघ नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी करने के लिए गोर्बाचेव सुधार हेतु बाध्य हुए।

(4) सोवियत संघ अपने निवासियों की राजनीतिक तथा आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहा था, अत: गोर्बाचेव सुधार के लिए बाध्य हुए।

(5) सोवियत संघ में उपभोक्ता वस्तुओं की कमी तथा खाद्यान्नों का आयात लगातार बढ़ता जा रहा था, अत: गोर्बाचेव सुधार के लिए बाध्य हुए।

 

प्रश्न 2. सोवियत संघ विघटन की प्रक्रिया पर एक टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-सोवियत संघ विघटन का घटना चक्र सोवियत संघ विघटन के घटनाचक्र को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है

(1) गोर्बाचेव का महासचिव बनना- मार्च 1985 में सोवियत संघ कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के पद पर मिखाइल गोर्बाचेव का चयन हुआ जिन्होंने देश में सुधारों की श्रृंखला का श्रीगणेश किया।

( 2 ) आजादी हेतु आन्दोलनों की शुरुआत 1988 में आजादी हेतु लिथुआनिया में आन्दोलन शुरू हुआ जो कालान्तर में एस्टोनिया तथा लताविया में भी तेज गति से विस्तारित हुआ।

(3) सोवियत घोषणा- अक्टूबर 1989 में सोवियत संघ द्वारा यह घोषणा की गयी कि ‘वारसा समझौते’ के सदस्य अपना-अपना भविष्य निर्धारित करने के लिए पूर्णरूपेण आजाद हैं।

(4) लिथुआनिया द्वारा आजादी की घोषणा – मार्च 1990 में लिथुआनिया ने सोवियत संघ से अलग होने की घोषणा करके गणराज्य के पहले अलग होने वाले राज्य का दर्जा प्राप्त किया।

(5) रूसी संसद द्वारा आजादी की घोषणा- जून 1990 में रूसी संसद द्वारा सोवियत संघ से अलग होने का निर्णय लेकर अपनी आजादी की घोषणा कर दी।

(6) येल्तसिन का त्यागपत्र – बोरिस येल्तसिन रूसी कम्युनिष्ट पार्टी के प्रमुख बने । हालांकि गोर्बाचेव ने इनको मास्को का मेयर बनवाया था लेकिन इन्होंने कुछ समय बाद ही गोर्बाचेव की आलोचनाएँ करना शुरू कर दिया। अन्ततः जून 1991 में इन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी से त्यागपत्र देकर रूसी राष्ट्रपति का पद सम्भाला।

(7) गोर्बाचेव के खिलाफ असफल विद्रोह-अगस्त 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी के गरमपंथियों ने सोवियत राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव के खिलाफ विद्रोह किया लेकिन उनका यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।

(8) बाल्टिक गणराज्यों की यू.एन.ओ. की सदस्यता – सितम्बर 1991 में बाल्टिक गणराज्य- एस्टोनिया, लताविया तथा लिथुआनिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता ले ली।

(9) राष्ट्रकुल का निर्णय- दिसम्बर 1991 में रूस, बेलारूस तथा उक्रेन ने 1992 की सोवियत संघ के निर्णय सम्बन्धी समझौते को समाप्त करने का फैसला लेकर स्वतन्त्र राष्ट्रों के ‘राष्ट्रकुल’ का निर्माण किया। इस स्वतन्त्र राष्ट्रकुल में आर्मेनिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, माल्दोवा, किरगिजस्थान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा उज्बेकिस्तान भी शामिल हुए।

(10) गोर्बाचेव का राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र- 25 दिसम्बर, 1991 को मिखाइल गोर्बाचेव के सोवियत संघ राष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देने के साथ ही सोवियत संघ का विघटन हो गया। संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ के स्थान पर रूस को प्रतिनिधित्व दिया गया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि 1993 में जार्जिया भी राष्ट्रकुल का सदस्य बन गया।

 

प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन के परिणामों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर-सोवियत संघ विघटन के परिणाम

सोवियत संघ के विघटन के परिणामों को अग्र बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

(1) वर्तमान में वैश्विक स्तर पर अमेरिका ही एकमात्र महाशक्ति के रूप में शेष बच है तथा अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति पर उसका वर्चस्व स्थापित हुआ है।

(2) सोवियत संघ के सभी गणराज्यों की आजादी के बाद रूस का नेतृत्व बोरिस येल्तसिन द्वारा किया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में रूस को सदस्य बनाया गया। तीसरी दुनिया के देशों से जो समझौते पूर्व सोवियत संघ ने किए थे उनके निर्वाह का उत्तरदायित्व अब रूस का है।

(3) सोवियत संघ से जितने गणराज्य अलग हुए थे उन्होंने स्वतन्त्र एवं सम्प्रभु राष्ट्र के रूप में अपनी अपनी शक्तियों में अभिवृद्धि कर ली है।

(4) हालांकि सोवियत संघ के विघटन के फलस्वरूप भारत ने अपना एक विश्वासपात्र मित्र खोया था लेकिन वर्तमान अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में रूस हमारे देश के साथ मित्रता की कसौटी पर खरा उतर रहा है।

(5) एशिया में वियतनाम तथा कम्बोडिया (कम्पूचिया) को सोवियत संघ से विपुल सहायता प्राप्त होती रहती थी लेकिन अब उन्हें विभिन्न संकटों के दौर से गुजरना पड़ रहा है।

(6) मध्य पूर्व तेल भण्डारों पर जहाँ अमेरिकी वर्चस्व स्थापित हुआ है वहीं तीसरी दुनिया के देशों में साम्यवादी गतिविधियाँ लुप्तप्राय: हो चुकी हैं।

(7) सोवियत संघ के विघटन के फलस्वरूप लैटिन अमेरिका में भी वामपंथी आन्दोलन शिथिल पड़ गए तथा अब इस क्षेत्र में भी अमेरिका का नियन्त्रण स्थापित हुआ है।

(8) सोवियत संघ के विघटन ने गुट निरपेक्ष आन्दोलन की प्रासांगिकता पर भी एक प्रश्न चिह्न लगाया है।

(9) सोवियत संघ पतनोपरान्त संयुक्त राष्ट्र संघ सहित विश्व की विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक एवं वित्तीय संस्थाओं पर अमेरिका का पूर्णरूपेण एकक्षत्र नियन्त्रण स्थापित हो गया है। उक्त से स्पष्ट है कि सोवियत संघ के विघटन की ऐतिहासिक घटना ने संसार के सभी राष्ट्रों को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया है।

 

 

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