pariksha adhyayan class 11th इतिहास – HISTORY अध्याय 5 चुनाव और प्रतिनिधित्व MP BOARD SOLUTION

अध्याय 5
चुनाव और प्रतिनिधित्व

अध्याय 5 चुनाव और प्रतिनिधित्व
अध्याय 5
चुनाव और प्रतिनिधित्व

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. भारतीय राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल होता है-
(1) चार वर्ष (ii) पाँच वर्ष
(iii) छ: वर्ष (iv) सात वर्ष।

2. भारत में निर्वाचन आयोग का कार्य नहीं है-
(I) पंचायत चुनाव (ii) सरपंच चुनाव
(iii)शिक्षक चुनाव (iv) विधानसभा चुनाव।

3. भारत के प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थे ?
(i) डॉ. नगेन्द्र सिंह (ii) सुकुमार सेन
(iii) टी. स्वामीनाथन (iv) के. वी. के. सुन्दरम।

4. भारत की प्रथम महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त कौन थीं?
(i) किरण बेदी (ii) श्रीमती प्रतिभा पाटिल
(iii) श्रीमती वी. एस. रमादेवी (iv) नजमा हेपतुल्ला।

5. मुख्य निर्वाचन आयुक्त का वेतन किसके वेतन के बराबर होता है ?
(i) राष्ट्रपति (ii) उपराष्ट्रपति
(iii) प्रधानमन्त्री (iv) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश

6. भारतीय संविधान के किस अध्याय में चुनाव प्रणाली का उल्लेख किया गट है?
(i) अध्याय 3 (ii) अध्याय 4
(iii) अध्याय 15 (iv) अध्याय 18.

7. निम्न में से कौन-सी मतदान की एक प्रणाली नहीं है ?
(i) प्रत्यक्ष मतदान (ii) अप्रत्यक्ष मतदान
(iii) सूची प्रणाली (iv) सार्वभौमिक वयस्क मताधिक

8. निम्नांकित में प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली का गुण नहीं है-
(i) राजनीतिक शिक्षा
(ii)बुद्धिमान लोगों की चुनाव से दूरी
(ii) मतदाता एवं प्रतिनिधि के बीच सम्पर्क
(iv) लोकतन्त्र के अनुकूल।

9. अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली का दोष है-
(1) भष्टाचार की आशंका
(ii) जनसाधारण का प्रतिनिधि से सम्पर्क नहीं
(iii) सार्वजनिक कार्यों में उदासीनता
(iv) उपर्युक्त सभी।

10. आनुपातिक प्रतिनिधित्व का अवगुण अथवा दोष है-
(i) वर्गीय हितों को प्रोत्साहन
(ii) विभिन्न राजनीतिक दलों एवं गुटों का उदय
(ii) निर्वाचकों एवं प्रतिनिधियों में सम्पर्क नहीं
(iv) उपर्युक्त सभी।

उत्तर-1. (ii), 2. (ii), 3. (ii), 4. (ii), 5. (iv), 6. (iii), 7. (iv), 8. (ii). 9.(iv), 10. (iv).

रिक्त स्थान पूर्ति

1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त की पदच्युति संसद द्वारा ………..प्रस्ताव पारित करते सम्भव है।

2. भारत में स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने का उत्तरदायित्व ……….का है।

3. भारत में बहुसदस्यीय निर्वाचन आयोग की स्थापना सर्वप्रथम ……….में की गई।

4. जिन व्यक्तियों को मताधिकार प्राप्त होता है, उन्हें
…………कहा जाता है।

5. प्रतिनिधियों को चुनने की विधि को……..कहते हैं।
,
6. भारत में निर्वाचन की विधि ‘जो सबसे आगे, वही जीते’ प्रणाली को अपनाया गया है जिसे…..….. भी कहते हैं।

7. चुनाव में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारित करने का कार्य ……… आयोग करता है।

8. हेरिंग्टन तथा काउण्ट अण्डरेसी ने……..…. का प्रबल समर्थन किया

9. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का प्रतिपादन…..….. ने किया था।

10……….मतदान प्रणाली में मतदाता सीधे ही अपने प्रत्याशियों को निर्वाचित करता है।

उत्तर-1. महाभियोग, 2. निर्वाचन आयोग, 3. सन् 1989,
4. मतदाता, 5. चुनाव अथवा निर्वाचन, 6. बहुलवादी व्यवस्था, 7. परिसीमन, 8. गुप्त मतदान, 9. थामस हेयर,

एक शब्द/वाक्य में उत्तर

1. भारत में प्रथम आम चुनाव (सामान्य निर्वाचन) किस वर्ष में हुआ था ?
उत्तर-1952.

2. जो चुनाव विधान मण्डल के निश्चित कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व कराए जातेहैं, उन्हें क्या कहा जाता है ?
उत्तर-मध्यावधि चुनाव ।

3. चुनाव आयोग एक कैसी संस्था है ?
उत्तर-संवैधानिक संस्था।

4. भारत में चुनाव याचिका की सुनवाई कौन करता है ?
उत्तर-उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय।

5. बेन्थम तथा डेविड हेयर ने किस मताधिकार का समर्थन किया था ?
उत्तर-महिला।

6. किस निर्वाचक प्रणाली में मतदाता निर्वाचक मण्डल को तथा निर्वाचक मण्डल प्रतिनिधि को चुनता है ?
उत्तर-अप्रत्यक्षा

7. “वयस्क मताधिकार का कोई विकल्प नहीं है।” यह किस विद्वान् का कथन है ?
उत्तर-लॉस्की का।

8. भारत में ब्रिटिश शासन द्वारा मुसलमानों को अपने अलग प्रतिनिधि चुनने का अधिकार किस अधिनियम द्वारा प्रदान किया गया ?
उत्तर-सन् 1909 के अधिनियम द्वारा।

9. आदर्श निर्वाचन प्रणाली का एक प्रमुख तत्त्व लिखिए।
उत्तर-गुप्त मतदान।

10. गुप्त मतदान प्रणाली कहाँ सफल हो सकती है?
उत्तर-बड़े राज्यों में।

सत्य/असत्य

1. मतदाता सूचियाँ तैयार कराने तथा स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव करान का उत्तरदायित्व चुनाव आयोग का है।

2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(1) द्वारा देश में एक निर्वाचन आयोग की स्थापना की गई है।

3. लोकसभा चुनावों में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली प्रयुक्त की जाती है।

4. भारतीय मतदान निष्पक्ष है।

5. भारत में मतदान की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है।

6. मताधिकार से व्यक्ति में राज्य के प्रति उत्तरदायित्व की
भावना पैदा होती है।

7. जन प्रतिनिधियों के चुनाव करने की पद्धति को प्रतिनिधित्व की प्रणाली कहते हैं।

8. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली में मतों की बर्बादी होती है।

9. सूची प्रणाली में चुनाव क्षेत्रों का आकार बड़ा होता है तथा प्रत्येक क्षेत्र से कई सदस्य चुने जाते हैं।

उत्तर-1. सत्य, 2.सत्य, 3. असत्य, 4.सत्य, 5. सत्य 6. सत्य,
7.सत्य,8. असत्य 9.सत्य।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भारतीय चुनाव आयोग की किन्हीं दो समस्याओं को लिखिए।
उत्तर-(1) दिन-प्रतिदिन चुनाव आयोग का कार्य लगातार बढ़ता ही जा रहा है, परन्तु उसके लिए उसके पास पर्याप्त कर्मचारियों की कमी है तथा (2) चुनाव सुधारों हेतु चुनाव
आयोग अनेक प्रभावी कदम उठाना चाहता है, लेकिन इस प्रयोजन हेतु उसे राजनीतिक दलों का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाता है।

प्रश्न 2. अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने वाली प्रमुख प्रणालियाँ कौन-सी हैं ?
उत्तर-आनुपातिक प्रतिनिधित्व, संचित मत प्रणाली, सीमित मत प्रणाली, द्वितीय मत प्रणाली, पृथक् निर्वाचन प्रणाली तथा आरक्षित स्थान युक्त संयुक्त निर्वाचन प्रणाली
अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने वाली प्रणाली हैं।

प्रश्न 3. क्षेत्रीय एवं कार्यात्मक प्रतिनिधित्व में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर-(1) जहाँ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में प्रतिनिधित्व देने का आधार क्षेत्रीय होता है, वहीं कार्यात्मक प्रतिनिधित्व में व्यवसाय के आधार पर प्रतिनिधित्व होता है।
(2) क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व में प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के समस्त लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि कार्यात्मक प्रतिनिधित्व में प्रतिनिधि व्यवसाय के लोगों का ही प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न 4. भारत में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली अपनाने के दो कारण लिखिए।
उत्तर-(1) हमारे देश में एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रयोग किया गया है तथा (2) आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की अपेक्षाकृत फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली अधिक सरल है।

प्रश्न 5. भारतीय चुनाव प्रणाली के दो दोष लिखिए।
उत्तर-(1) भारतीय चुनाव में अत्यधिक धनराशि व्यय होती है जो राजनीतिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।
(2) भारतीय चुनाव प्रणाली की कमियों का लाभ उठाते हुए कुछ अपराधी भी चुनाव लड़ कर विधायिका की सदस्यता हासिल कर रहे हैं।

प्रश्न 6. भारत में चुनाव सुधार हेतु कोई दो सुझाव दीजिए।
उत्तर-(1) राजनीतिक दलों की कार्यप्रणाली को नियन्त्रित करने तथा उनकी कार्य- विधि को अधिक पारदर्शी एवं लोकतान्त्रिक बनाने हेतु एक सशक्त कानून बनाया जाना चाहिए तथा (2) चुनाव प्रचार में जाति एवं धर्म के आधार पर की जाने वाली किसी भी अपील को पूर्णतया प्रतिबन्धित कर देना चाहिए।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भारतीय निर्वाचन आयोग का गठन किस प्रकार होता है ?
उत्तर-संविधान के अनुच्छेद 324 (2) के अनुसार, चुनाव आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा दो अन्य निर्वाचन आयुक्त हैं जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग के परामर्श से आयोग की सहायता हेतु प्रादेशिक चुनाव आयुक्तों को नियुक्त करता है। भारतीय चुनाव आयोग के मुख्य अंग निर्वाचन आयुक्त, प्रादेशिक
आयुक्त, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य स्तर पर रिटर्निंग अधिकारी, जिलाधिकारी, पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी तथा चुनाव से सम्बन्धित अन्य कर्मचारी हैं। निर्वाचन आयोग को कार्यपालिका के नियन्त्रण से पूर्णरूपेण स्वतन्त्र रखा गया है। वर्तमान में सुनील अरोड़ा मुख्य
निर्वाचन आयुक्त तथा अशोक लवासा एवं सुशील चन्द्रा चुनाव आयुक्त हैं।

प्रश्न 2. मतदाता पहचान पत्र का क्या महत्व है ?
उत्तर-मतदान के दौरान होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मतदाता पहचान पत्र की विशेष उपयोगिता है। इसमें मतदाता के फोटो सहित उसके नाम, पते तथा उम्र इत्यादि का
विवरण अंकित होता है, जिससे वास्तविक मतदाता की पहचान सरलता से की जा सकती है। इसके बिना फर्जी मतदान की सम्भावना काफी बढ़ जाती है तथा चुनावों में अयोग्य एवं बाहुबली प्रत्याशियों का चयन हो सकता है। अतः निष्पक्ष चुनाव के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक मतदाता अपना पहचान पत्र रखे ताकि कोई भी व्यक्ति उसके मताधिकार का दुरुपयोग न कर सके। अभी हाल में सरकार द्वारा मतदाता पहचान को और अधिक उपयोगी बनाने हेतु
इसका विविध क्षेत्रों में प्रयोग अनिवार्य कर दिया है।

प्रश्न 3. चुनाव आयोग को अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु कौन-कौन-से चार परिवर्तन किए जाने चाहिए ?
उत्तर-चुनाव आयोग को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए निम्न प्रमुख परिवर्तन किए जाने चाहिए-
(1) चुनाव आयोग का विस्तार किया जाए तथा इसमें चुनाव विशेषज्ञों को भी शामिलचाहिए। किया जाना चाहिए।
(2) चुनाव आयोग को अधिक शक्तिसम्पन्न बनाने हेतु उसे न्यायिक अधिकार प्रदत्त किए जाने चाहिए, जिससे वा उन लोगों को दण्डित कर सके जो निर्वाचन के दौरान बेईमानी
तथा गड़बड़ी करते हैं।
(3) चुनाव आयोग को इतना सशक्त किया जाए कि वह अपने उत्तरदायित्वों का उचित निर्वहन कर सके।
(4) चुनाव आयोग की गतिविधियों में राजनीतिक दलों का बेवजह का हस्तक्षेप बन्द किया जाना चाहिए।

प्रश्न 4. ‘समानुपातिक प्रतिनिधित्व’ और ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ चुनाव व्यवस्था के बीच कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर-‘समानुपातिक प्रतिनिधित्व’ और ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ चुनाव व्यवस्था के बीच मुख्य रूप से निम्नलिखित अन्तर हैं–
(1) समानुपातिक प्रतिनिधित्व व्यवस्था में किसी बड़े भौगोलिक क्षेत्र को एक निर्वाचन क्षेत्र मान लिया जाता है और सम्पूर्ण देश ही एक निर्वाचन क्षेत्र समझा जाता है, जबकि
‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ प्रणाली में सारे देश को छोटी-छोटी भौगोलिक इकाइयों में विभक्त कर उसे निर्वाचन क्षेत्र कहा जाता है।
(2) समानुपातिक प्रतिनिधित्व में एक निर्वाचन क्षेत्र में अनेक प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जबकि ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ पद्धति में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से मात्र एक प्रतिनिधि ही निर्वाचित होता है।
(3) समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली में जहाँ मतदाता दल को मतदान करता है, वहीं ‘सर्वाधिक पाने वाले की जीत’ चुनाव व्यवस्था में मतदाता प्रत्याशी को मत (वोट) देता है।
(4) समानुपातिक प्रतिनिधित्व चुनाव व्यवस्था में विजयी प्रत्याशी को मतों (वोटों) का बहुमत मिलता है, जबकि ‘सर्वाधिक वोट पाने वाले की जीत’ चुनाव प्रणाली में विजयी
उम्मीदवार के लिए यह जरूरी नहीं है कि वोटों अर्थात् मतों का बहुमत (50% + 1) उसे हासिल हो।

प्रश्न 5. एकल संक्रमणीय प्रणाली को समझाइए।
उत्तर-एकल संक्रमणीय मत प्रणाली में प्रत्येक चुनाव क्षेत्र से तीन अथवा उससे अधिक प्रत्याशी होते हैं। इसमें मतदाता को सिर्फ एक मत देने का अधिकार है। उसका प्रयोग वह मतपत्र पर अपनी वरीयता के क्रम को प्रकट करते हुए देता है, अर्थात् सर्वप्रथम उसका मत अमुक प्रत्याशी को तत्पश्चात् अन्य उम्मीदवार को तथा उसके बाद अन्य प्रत्याशी को मिलना
चाहिए। विजयी होने के लिए प्रत्येक प्रत्याशी को एक निश्चित मत संख्या का समर्थन हासिल करना होता है। इस निश्चित मत संख्या को ज्ञात करने हेतु निम्नलिखित सूत्र प्रयुक्त होता है-

प्रश्न 6. सूची प्रणाली से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- सूची प्रणाली में दलीय आधार पर प्रत्याशियों की अलग-अलग सूचियाँ बना ली जाती हैं। प्रत्येक मतदाता निर्वाचित होने वाले सदस्यों की संख्या के बराबर मत दे सकता है। हालांकि वह एक प्रत्याशी को एक ही मत देता है। इस प्रणाली में मतदान का परिणाम अलग-अलग प्रत्याशियों को मिले मतों के अनुसार न निकालकर प्रत्याशियों को प्राप्त सब मत सूचियों के हिसाब से निकालते हैं। इसमें भी एकल संक्रमणीय मत प्रणाली की तरह निश्चित मत संख्या निकाली जाती है। उस मत संख्या के अनुसार, प्राप्त मतों के आधार पर प्रत्येक सूची में से कौन प्रत्याशी चुने जाने चाहिए, यह निकाल लिया जाता है। इसमें उन प्रत्याशियों को विजयी समझा जाता है, जिन्होंने इस सूची में सर्वाधिक मत हासिल किये हों।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. भारतीय निर्वाचन आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ लिखिए।
उत्तर- भारतीय निर्वाचन आयोग के कार्य एवं शक्तियाँ
भारतीय निर्वाचन (चुनाव) आयोग के कार्य एवं शक्तियों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन-प्रत्येक जनगणना के बाद निर्वाचन आयोग अपनी अध्यक्षता में एक परिसीमन आयोग गठित करता है, जो चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण
करने का कार्य करता है।
(2) मतदाता सूचियाँ बनवाना-समय-समय पर होने वाले चुनावों हेतु मतदाता सूचियों को संशोधित कराने अथवा उनका निर्माण कराने का उत्तरदायित्व भारतीय निर्वाचन
आयोग का ही है।
(3) चुनाव कार्यक्रम घोषित करना-देश में होने वाले चुनावों का कार्यक्रम चुनाव आयोग द्वारा ही घोषित किया जाता है। चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामांकन करने से लेकर
उनके चुनाव परिणाम की घोषणा तक का विस्तृत कार्यक्रम चुनाव आयोग द्वारा तैयार किया जाता है तथा उसकी घोषणा भी उसी के द्वारा की जाती है।
(4) राजनीतिक दलों को मान्यता देना-चुनाव आयोग का एक कार्य राजनीतिक दलों को मान्यता देना भी है। वह दलों को चुनाव चिह्न भी आबंटित करता है तथा चुनाव चिह्नों
पर कोई विवाद होने पर उसका फैसला भी उसी के द्वारा किया जाता है।
(5) विधायिका के सदस्यों की अयोग्यता के बारे में परामर्श देना-भारतीय निर्वाचन आयोग राष्ट्रपति को सांसदों तथा सम्बन्धित राज्यों के राज्यपालों को विधायिका की
अयोग्यता के विषय में परामर्श देने का भी अधिकार रखता है। उसके परामर्श के आधार पर विधायिका सदस्यों की कालावधि को कम अथवा समाप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 2. निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न सोपानों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर-निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न सोपान निम्नवत् हैं-
(1) निर्वाचन सूची (नामावली) बनना-प्रत्येक चुनाव से पहले सम्बन्धित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची बनाई जाती है। इसमें नये वयस्क मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं तथा निर्वाचन क्षेत्र से बाहर चले गए और मृत्यु प्राप्त कर चुके मतदाताओं के नाम हटा दिए जाते हैं।
(2) चुनाव कार्यक्रम की घोषणा-चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण में नामांकन पत्र भरने एवं उनकी जाँच करने, नाम वापस लेने, चुनाव की तिथि तथा मतगणना की तारीख घोषित की जाती है। इस प्रक्रिया को चुनाव की अधिसूचना जारी करना भी कहते हैं।
(3) प्रत्याशियों को चुनाव-चिह्नों का आबंटन-नाम वापसी के पश्चात् शेष बचे योग्य प्रत्याशियों को निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव चिह्नों का आबंटन किया जाता है। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों के अधिकृत प्रत्याशियों को आरक्षित चुनाव चिह्न तथा निर्दलियों (स्वतन्त्र) को अन्य चुनाव चिह्नों में से कोई एक चिह्न आबंटित किया जाता है।
(4) चुनाव प्रचार-निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्याशी तय की गई समय-सीमा तक विभिन्न माध्यमों द्वारा सम्बन्धित क्षेत्र के मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने हेतु चुनाव प्रचार करते हैं। इस दौरान वे लोकलुभावन नारे एवं चुनावी घोषणा-पत्र भी जारी करते हैं।
(5) मतदान-निर्धारित तिथि पर समय-सीमा के अन्दर क्षेत्र के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। निर्वाचन के दौरान किसी क्षेत्र विशेष में हिंसा एवं उपद्रव होने की स्थिति में सम्बन्धित क्षेत्र के मतदान को रद्द करके वहाँ फिर से वोट डालने की व्यवस्था की जाती है।
(6) चुनाव परिणाम-निर्धारित तिथि एवं समय पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतों की गिनती करके सर्वाधिक मत हासिल करने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित करके उसे तत्सम्बन्धी प्रमाण-पत्र दे दिया जाता है।

प्रश्न 3. भारतीय निर्वाचन प्रणाली के गुण अथवा विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- भारतीय निर्वाचन प्रणाली के गुण अथवा विशेषताएँ
भारत की निर्वाचन प्रणाली के प्रमुख गुण अथवा विशेषताओं को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार-भारतीय निर्वाचन प्रणाली का प्रमुख गुण सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार है। देश में प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना भेदभाव के अपना
वोट देने का अधिकार दिया गया है।
(2) गुप्त मतदान व्यवस्था-भारतीय मतदाता ने अपना मत किसके पक्ष में दिया है, इसकी जानकारी किसी दूसरे को न हो सके इसलिए देश ने गुप्त मतदान प्रणाली की व्यवस्था
कर सकता है। को अपनाया है। ऐसा करने से भारतीय मतदाता निर्भय होकर अपनी इच्छा से मत का प्रयोग
(3) मुख्यतया प्रत्यक्ष तथा गौण रूप से अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली-भारतीय निर्वाचन प्रणाली की एक अन्य विशेषता यह है कि देश में कुछ विशेष पदों, अर्थात् राष्ट्रपति के पद तथा राज्य सभा एवं विधानपरिषद् सदस्यों के चुनाव को छोड़कर शेष सभी चुनाव प्रत्यक्ष विधि से होते हैं, अर्थात् संविधान द्वारा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष निर्वाचन विधियों में श्रेष्ठ समन्वय की स्थापना की गयी है।
(4) एक सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र-भारतीय निर्वाचन प्रणाली की एक अन्य विशेषता एकल सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र भी है। इससे जनप्रतिनिधियों में निकट सम्बन्ध स्थापित होते हैं।
(5) अल्पसंख्यकों को उचित प्रतिनिधित्व-भारतीय निर्वाचन प्रणाली में अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान किया गया है।

प्रश्न 4. प्रत्यक्ष मतदान (निर्वाचन) प्रणाली के गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के गुण
प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के गुणों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) सरल प्रणाली-मतदान की यह प्रणाली काफी सरल है तथा इसका प्रयोग निरक्षर एवं अज्ञानी लोगों द्वारा भी किया जा सकता है।
(2) लोकतान्त्रिक धारणा के अनुकूल-इस प्रणाली का एक गुण यह भी है कि यह मतदान प्रणाली जनता को अपने प्रतिनिधि स्वयं सीधे रूप से चुनने का मौका देती है। अतः
स्वाभाविक है कि यह लोकतान्त्रिक व्यवस्था के सर्वथा अनुरूप है।
(3) राजनीतिक जागृति-प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली से व्यक्ति अपने अधिकार एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होते हैं तथा उन्हें राजनीतिक शिक्षा भी मिलती है।
(4) जनप्रतिनिधियों का जनता से सीधा सम्पर्क-इस मतदान प्रणाली का एक प्रमुख गुण यह भी है कि इसमें जनप्रतिनिधियों का जनसाधारण से सीधा सम्पर्क स्थापित होता है।
(5) जनप्रतिनिधियों का उत्तरदायित्व-इस मतदान प्रणाली में जनप्रतिनिधि अपने कार्यों के लिए सीधे रूप से मतदाताओं के प्रति उत्तरदायी होते हैं।

प्रश्न 5. प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के दोष लिखिए।
उत्तर- प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के दोष
प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के प्रमुख दोषों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा
सकता है-
(1) प्रतिनिधियों का चयन त्रुटिपूर्ण-प्रायः साधारण मतदाता इस लायक नहीं होते हैं कि वे अपने मतों का ठीक प्रकार से प्रयोग कर पायें। अत: इस चुनाव प्रणाली से अयोग्य लोग भी चुने जा सकते हैं।
(2) पेशेवर राजनीतिज्ञों का बोलबाला-इस प्रणाली का एक दोष यह भी है कि इसमें पेशेवर राजनीतिज्ञों की भरमार रहती है। ये राजनीतिज्ञ जनसाधारण को अपने स्वार्थ के अनुरूप भ्रमित करने की कोशिश करते हैं जिसके फलस्वरूप लोग गलत धारणा के आधार पर मतदान कर सकते हैं।
(3) अपव्ययी प्रणाली-इस मतदान प्रणाली का एक दोष यह भी है कि यह प्रणाली काफी खर्चीली है। व्यापक पैमाने पर चुनाव का आयोजन करने में काफी धनराशि खर्च होती है। अत: योग्य लोग भी धन की कमी की वजह से चुनाव में भाग नहीं ले पाते हैं।
(4) सार्वजनिक शिक्षा का तर्क भ्रामक-प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में जो चुनाव प्रचार किया जाता है तथा जिसे राजनीतिक शिक्षा का साधन कहा जाता है वह असल में कुशिक्षा है। चुनावों के दौरान प्रत्याशियों के व्यक्तित्व एवं कार्यक्रमों को ठीक से समझाने के स्थान पर मतदाताओं को सोची-समझी रणनीति द्वारा भ्रमित किया जाता है।
(5) श्रेष्ठ लोग चुनावों से दूर रहते हैं-इस मतदान प्रणाली का एक दोष यह भी है कि इसमें झूठे प्रचार एवं भ्रष्ट तरीकों की वजह से राजनीतिक वातावरण इतना गन्दा हो जाता है
कि वे प्रतिभावान, श्रेष्ठ एवं सत्यनिष्ठ लोग चुनाव लड़ने का साहस नहीं जुटा पाते तथा राष्ट्र योग्यतम लोगों की सेवा से वंचित हो जाता है।

प्रश्न 6. अप्रत्यक्ष मतदान (निर्वाचन) प्रणाली के गुण-दोष लिखिए।
उत्तर-अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के गुण
अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली के प्रमुख गुणों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली का प्रमुख गुण यह है कि ये विशाल चुनाव क्षेत्रों के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है।
(2) अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली द्वारा योग्य व्यक्तियों के चुनाव की अधिक सम्भावनाएँ रहती हैं। चूँकि निर्वाचक मण्डल के सदस्य, सामान्य मतदाताओं की अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान होते हैं, अतः वे अधिक योग्य प्रतिनिधियों का चयन करते हैं।
(3) कम राजनीतिक जागरूकता के कारण नव स्थापित लोकतन्त्रों में जनता द्वारा अयोग्यों के प्रतिनिधि चुने जाने का भय अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली द्वारा दूर किया जा सकता है।
(4) अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली में मतदाताओं की सीमित संख्या रहती है। इसी प्रकार इस व्यवस्था में पेशेवर राजनीतिज्ञों की संख्या भी काफी कम रहती है।

अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के दोष

अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के चार प्रमुख दोष निम्न प्रकार हैं-
(1) यह मतदान प्रणाली भ्रष्टाचार को बल देती है क्योंकि इसमें जनता तथा प्रत्याशी के बीच सीधा सम्पर्क नहीं होता तथा दोनों के मध्यस्थ के रूप में निर्वाचक मण्डल होता है।
(2) अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली दलीय पद्धति के कुप्रभावों को सीमित करने की बजाए इसको और अधिक प्रोत्साहित करने का कार्य करती है।
(3) अप्रत्यक्ष प्रणाली में जनता चुनावों में सीधे हिस्सा नहीं लेती, जिसके फलस्वरू- वह राजनीतिक वातावरण से दूर रहती है।
(4) इस मतदान प्रणाली में जनता में सार्वजनिक कार्यों के प्रति उदासीनता की भावन उत्पन्न हो जाने की प्रबल सम्भावनाएँ रहती हैं।

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